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Raksha Bandhan Shubh Muhurat - [दिनभर में रक्षाबंधन के 3 मुहूर्त] सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी।

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Raksha Bandhan Shubh Muhurat - [दिनभर में रक्षाबंधन के 3 मुहूर्त]  सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी। दिनभर में रक्षाबंधन के 3 मुहूर्त

इस बार रक्षाबंधन पर सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनों को अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना चाहिए। 3 तारीख को सुबह 7.30 बजे के बाद पूरे दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही पूर्णिमा भी रात में 9.30 तक रहेगी। इसलिए सुबह 9.29 के बाद पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

Raksha Bandhan Shubh Muhurat - [दिनभर में रक्षाबंधन के 3 मुहूर्त]  सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी।


  • सुबह 9:35 से 11.07 तक

  • दोपहर 2.35 से 3.35 तक

  • शाम 4.00 से रात 8.35 तक

    • पानी का कलश - पूजा की थाली में तांबे का कलश होना होना चाहिए। कलश के पानी में तीर्थों और देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए भगवान और तीर्थों को साक्षी मानकर ये पवित्र कार्य किया जाता है।

  • चंदन और कुमकुम - रक्षाबंधन पर पूजा की थाली में चंदन और कुमकुम सबसे जरूरी है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि किसी भी शुभ काम की शुरुआत तिलक लगाकर ही की जानी चाहिए। इसलिए रक्षाबंधन में सबसे पहले बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाते हुए उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।

  • चावल - तिलक के बाद माथे पर अक्षत लगाया जाता है। चावल को अक्षत कहा जाता है। जिसका अर्थ है अक्षत यानी जो अधूरा न हो। इस तरह अक्षत लगाने से ही रक्षाबंधन का कार्य पूर्ण माना जाता है।

  • नारियल - नारियल को श्रीफल कहा जाता है। श्री का अर्थ होता है लक्ष्मी और समृद्धि। इसलिए भाई-बहन के जीवन में लक्ष्मी और समृद्धि की कामना से पूजा की थाली में नारियल का होना जरूरी है।

  • रक्षा सूत्र (राखी) - मणिबंध यानी कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से हर तरह के दोष खत्म होते हैं। माना जाता है कि मौली के धागे का कलाई की नसों पर दबाव पड़ने से सेहत संबंधी परेशानियां नहीं रहती।

  • मिठाई - राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाना इस बात का संकेत है कि रिश्तों में कभी कड़वाहट न आए। धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर शुभ काम को करने के बाद मुंह मीठा करना चाहिए। इससे मन प्रसन्न रहता है।

  • दीपक - दीपक की लौ से निकलने वाली ऊर्जा आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को भाई-बहन से दूर रखती है, जिससे दोनों के बीच प्रेम बढ़ता है। इसलिए रक्षाबंधन के बाद दीपक जलाकर भाई की आरती की जाती है।

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